हमारा विज़न
लोहा, लकड़ी ,तांबा पीतल वा अन्य धातुओं से मुतालिक पुस्तैनी दस्तकारी का काम करने वाली हिंदुस्तान की वह कॉम जिसको 6 अप्रैल 1975 को अमरोहा की सरजमी पर " सैफी" सरनेम मिला
इस कॉम ने खेत खलिहानों , वा कल कारखानों से लेकर जंगे मैदान और धरती से लेकर आसमान तक होने वाली प्रगति वा विकास के सभी कार्यों में अपना योगदान देकर देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं।
जूते चप्पल मरम्मत करने वालो की रांपी से लेकर ,बड़े बड़े कल पुर्जे बनाने, बांध वा पुलों के निर्माण में इस कॉम ने अपना महत्व पूर्ण योगदान दिया है।इसके अतिरिक्त सभी व्यवसायी वर्गो, दस्तकारों, जैसे कुम्हार, दर्जी, बुनकर, नाई, सुनार, राज मिस्त्री वा फर्नीचर निर्माता आदि के कामों में आने वाले औजार इसी कॉम के द्वारा बनाए जाते हैं।
अर्थात इस काम का देश वा समाज के विकास में बहुत अहम रोल रहा है।