हमारे बारे में

ऑल इण्डिया सैफी राब्ता कमेटी

हमारा प्रयास, सैफी समाज का विकास

7 अप्रैल 2021 में सैफियों के सुनहरे पचास साल नामक ग्रुप का गठन किया गया था।जिसमे लगभग 100 मेंबर्स जुड़े थे।उन्ही मेंबर्स ने मिलकर 15 अगस्त 2021 को ऑल इंडिया सैफी राब्ता कमेटी का गठन किया था।
27/02/2022 को अमरोहा के MH रिसोर्ट में कमेटी की पहली मीटिंग बुलाई गई।
10/06/2022 को कमेटी का पहला रजिस्ट्रेशन कराया गया था।जिसमे कुछ जबीब सैफी विवाद के कारण 24/09/2022 को पुनः रजिस्ट्रेशन कराया गया ।जिसका नंबर है JPN /06343/2022-2023

15+वर्ष

तजुर्बा समाज की सेवा में

मुख्य उद्देश्य

2024 में गोल्डन जुबली सैफी डे को भव्य रूप में आयोजित करके सैफी सरनेम देने वाले सभी बुजुर्गो वा उनके परिवार को सम्मानित करना। एजुकेशन सैफी समाज में अभी भी उच्च शिक्षा की बहुत कमी है।कमेटी इस पर विशेष रूप से क्रम बद्ध तरीके से कार्य करेगी। आर्थिक स्थिति को सुधारना सैफी समाज के गरीब तबके में रोजगार की स्थिति को बेहतर करने लिए बेरोजगार युवकों को तकनीकी तालीम दिलाई जाएगी।फंड एकत्र करके कारोबार को बेहतर करने में मदद की जाएगी। सामाजिक सुधार सैफी समाज को जागरूक करके समाज की बहुत सी बुराइयों को दूर किया जाएगा अर्थात ऑल इण्डिया सैफी राब्ता कमेटी "Health Wealth and twelfth" के सिद्धांत पर कार्य करेगी।

हमारे आदर्श
हमारा विज़न

लोहा, लकड़ी ,तांबा पीतल वा अन्य धातुओं से मुतालिक पुस्तैनी दस्तकारी का काम करने वाली हिंदुस्तान की वह कॉम जिसको 6 अप्रैल 1975 को अमरोहा की सरजमी पर " सैफी" सरनेम मिला इस कॉम ने खेत खलिहानों , वा कल कारखानों से लेकर जंगे मैदान और धरती से लेकर आसमान तक होने वाली प्रगति वा विकास के सभी कार्यों में अपना योगदान देकर देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं। जूते चप्पल मरम्मत करने वालो की रांपी से लेकर ,बड़े बड़े कल पुर्जे बनाने, बांध वा पुलों के निर्माण में इस कॉम ने अपना महत्व पूर्ण योगदान दिया है।इसके अतिरिक्त सभी व्यवसायी वर्गो, दस्तकारों, जैसे कुम्हार, दर्जी, बुनकर, नाई, सुनार, राज मिस्त्री वा फर्नीचर निर्माता आदि के कामों में आने वाले औजार इसी कॉम के द्वारा बनाए जाते हैं। अर्थात इस काम का देश वा समाज के विकास में बहुत अहम रोल रहा है।